Friday, February 6, 2009

यज्ञ से पवित्र होता है तन-मन एवं भवन


परम पूज्य संत श्री विजय कौशल महाराज जी
हर महीने पूर्णिमा एवं अमावस्या को प्रात: छोटा सा यज्ञ करें। यज्ञ से तन-मन एवं भवन भी पवित्र होता है। अमावस्या को यज्ञ करने से पितरों के आशीर्वाद से संतान एवं संपत्ति प्राप्त होती है एवं पूर्णिमा को यज्ञ करने से देवी देवता सभी कष्टों को दूर कर आनंद व शान्ति देते हैं।

विधि:-

यज्ञ वेदी के साथ मंगलमय दीपक प्रज्वलित करें एवं "ऊँ भूर्भुव: स्व:।।" मंत्र का उच्चारण करें एवं आचमन करें।

गायत्री-मंत्र की 24 आहूतियाँ दें।
ऊँ भूर्भुव: स्व:। तत्सवितुर्वरेण्यं-भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।।
महा-मत्र की 16 आहूतियाँ दें।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।।

निम्न चौपाइयों की 3 आहूतियाँ दें।
जेहि बिधि नाथ होय मोरा। करहु सो बेगि दास मैं तोरा।।
मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी।।
दीनदयाल बिरिद संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।

5 comments:

  1. बहुत ही अच्छा प्रयास है आपका। मनके शुद्ध आहार के लिये सद्साहित्य व महपुरुषों की वाणी की अति आवश्यकता है। आपका ब्लाग मन को शुद्ध करने के लिये पठकों का मार्गदर्शक सिद्ध होगा यही भगवान से प्रर्थना है।

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  2. JAI MAHARAJ JI

    ACHAL MISHRA

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  3. Jehi vidhi hoye nath hit mora

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  4. गुरु जी के चरणों में सादर प्रणाम। क्या अमावस्या एवं पूर्णिमा दोनों पर इन्ही सब मंत्रों से आहुति देनी है या अमावस्या एवं पूर्णिमा के लिए मंत्र अलग अलग है।

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